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स्कूल बस में छात्रा के साथ मारपीट के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग सख्त

सभी स्कूल वाहनों का नियमित निरीक्षण कर 23 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Haryana Human Rights Commission : हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के अनुपालन में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यभर में स्कूल बसों और वाहनों की जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

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नूंह जिले के एक निजी स्कूल में सात वर्षीय छात्रा के साथ कथित अमानवीय व्यवहार के मामले ने अब पूरे हरियाणा में स्कूल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल बसों और शैक्षणिक परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। आयोग की पूर्ण पीठ चेयरमैन न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने सुनवाई के दौरान पाया कि जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रबंधन की रिपोर्टों में भारी विरोधाभास हैं। इसी को लेकर आयोग ने अधिकारियों को दोबारा निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि निरीक्षण टीम को स्कूल परिसर में केवल दो बसें मिलीं। इनमें से एक बस में सीसीटीवी कैमरा ही नहीं था, जबकि दूसरी बस में कैमरा चालू है या रिकॉर्डिंग कर रहा है, इसका कोई प्रमाण स्कूल प्रबंधन नहीं दे सका। इसके उलट स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि संस्थान की सभी छह बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी जा रही है। इसी विरोधाभास पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, नूंह को सभी बसों और स्कूल परिसर का दोबारा निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट देने के आदेश दिए। आयोग ने यह भी कहा कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रूप से काम करना और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही पुलिस अधीक्षक, नूंह को छात्रा को लगी चोटों और पुलिस कार्रवाई की पुनः जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

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क्या है मामला

यह पूरा मामला नूंह जिले के गांव छछेरा स्थित एक निजी विद्यालय से जुड़ा है, जहां कक्षा तीसरी की सात वर्षीय छात्रा के साथ कथित रूप से शारीरिक दंड देने का मामला सामने आया था। आरोप है कि छात्रा ब्लैकबोर्ड पर सवाल हल नहीं कर सकी, जिसके बाद अध्यापिका ने उसे डंडे से पीटा। बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस कार्रवाई भी समय पर नहीं हुई। इसी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने सुनवाई शुरू की थी। सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक, नूंह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित हुए।

क्या कहा आयोग ने

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आयोग ने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड बच्चों के अधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार, राज्यभर की जिला और उपमंडल स्तरीय समितियों को सभी स्कूल वाहनों का नियमित निरीक्षण कर 30 जुलाई को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले अनुपालन रिपोर्ट आयोग में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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